संक्षिप्त समाचार 22-07-2026

‘अंगेन’ को राष्ट्रीय पुरस्कार

पाठ्यक्रम: जीएस-1/कला एवं संस्कृति

सन्दर्भ

  • झारखंड की संताली फ़िल्म ‘अंगेन’ ने 72वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार में गैर-फीचर श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ प्रथम फ़िल्म (निर्देशक) का पुरस्कार जीता है।

परिचय

  • यह राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली संताली फ़िल्म है।
  • इसका निर्देशन रवि राज मुर्मू ने किया है। यह 12 मिनट 10 सेकंड की लघु फ़िल्म है, जो झारखंड की एक रहस्यमयी लोककथा से प्रेरित है।
  • संताली संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से एक है।
  • भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषाओं की सूची दी गई है।
  • बोड़ो, डोगरी, मैथिली और संताली को संविधान (बानवेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया था।

संताल (Santals)

  • प्रमुख राज्य: झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और असम। ये बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में भी पाए जाते हैं।
  • भाषा: संताली, जो ऑस्ट्रोएशियाई भाषा परिवार की मुंडा शाखा से संबंधित है।
  • लिपि: ओल चिकी (ओल चेमेत’), जिसका विकास पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में किया था।
  • संतालों ने 1855–56 में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन, शोषक जमींदारों तथा साहूकारों के विरुद्ध संताल हूल (संताल विद्रोह) का नेतृत्व किया था।

राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार

  • राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार (NFA) की स्थापना 1954 में भारत में सिनेमाई उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
  • ये पुरस्कार प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा फ़िल्म निर्माण में उत्कृष्टता का सम्मान करने के लिए प्रदान किए जाते हैं।
  • ये पुरस्कार विभिन्न भाषाओं और विधाओं में श्रेष्ठ फ़िल्मों, अभिनय तथा तकनीकी उपलब्धियों को मान्यता देते हैं।
  • पात्रता: पिछले वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा प्रमाणित फ़िल्में पात्र होती हैं।
  • पुरस्कारों की घोषणा फ़िल्म समारोह निदेशालय द्वारा नियुक्त निर्णायक मंडल करता है तथा इन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के प्रथम पुरस्कार 1968 में क्रमशः उत्तम कुमार और नर्गिस को दिए गए थे।
  • प्रारंभ में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार को ‘उर्वशी’ तथा सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार को ‘भारत’ कहा जाता था।

स्रोत: IE

बटुकेश्वर दत्त

पाठ्यक्रम: जीएस-1/आधुनिक इतिहास

सन्दर्भ

  • सरकार ने क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

परिचय

  • बटुकेश्वर दत्त बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक काल के एक भारतीय क्रांतिकारी थे।
  • उनका जन्म 18 नवंबर 1910 को बंगाल के बर्दवान जिले में हुआ था।
  • वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के सदस्य थे।
  • 12 जून 1929 को दिल्ली विधानसभा बम कांड में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने भारत की विभिन्न  जेलों में नौ वर्ष बिताए।
  • प्रत्येक जेल में उन्होंने राजनीतिक बंदियों के साथ मानवीय व्यवहार की माँग को लेकर भूख हड़ताल की। उन्होंने दो बार एक महीने से अधिक समय तक उपवास भी किया।
  • रिहाई के बाद उन्होंने महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और पुनः चार वर्ष के लिए कारावास भेजे गए।
  • लंबी बीमारी के बाद 20 जुलाई 1965 को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उनका निधन हुआ।
  • उनका अंतिम संस्कार पंजाब के फिरोजपुर के निकट हुसैनीवाला में किया गया, जहाँ कई वर्ष पूर्व भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का भी अंतिम संस्कार किया गया था।

हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA)

  • स्थापना: कानपुर, 1924।
  • संस्थापक: राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक़ुल्ला ख़ान, शचीन्द्रनाथ बख्शी, शचीन्द्रनाथ सान्याल तथा जोगेश चंद्र चटर्जी।
  • मुख्य सिद्धांत: सशस्त्र संघर्ष और जनभागीदारी के माध्यम से संघीय गणराज्य की स्थापना।

हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (1928)

  • स्थापना: फिरोज शाह कोटला, दिल्ली, 1928।
  • प्रमुख नेता: भगत सिंह, सुखदेव, शिव वर्मा, चंद्रशेखर आज़ाद और विजय कुमार सिन्हा।
  • मुख्य सिद्धांत: भारत में समाजवादी गणराज्य की स्थापना; राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को भी सुनिश्चित करना।

स्रोत: AIR

निफ्टी 500 अहिंसा सूचकांक

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

चर्चा में क्यों?

  • एनएसई इंडाइसेज़ लिमिटेड (एनएसई की सूचकांक निर्माण इकाई) ने निफ्टी500 अहिंसा सूचकांक प्रारंभ किया है। यह एक शेयर बाज़ार सूचकांक है, जो पूरी तरह पशुओं के प्रति अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित है।

परिचय

  • निफ्टी500 अहिंसा सूचकांक निफ्टी 500 की उन कंपनियों का चयन करता है जो पशुओं को हानि पहुँचाकर लाभ नहीं कमातीं, और उनके संयुक्त शेयर प्रदर्शन का आकलन करता है। सामान्य ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) सूचकांकों की तरह केवल पर्यावरण या शासन संबंधी मानकों की जाँच करने के बजाय, यह एक सरल प्रश्न पूछता है—क्या कंपनी का व्यवसाय पशुओं को हानि पहुँचाता है या नहीं? वर्तमान में इसमें 326 कंपनियाँ शामिल हैं।
  • इसका उद्देश्य निवेशकों को केवल “क्रूरता-मुक्त” व्यवसायों में निवेश करने का एक तैयार विकल्प उपलब्ध कराना है।
  • यह एनएसई इंडाइसेज़ लिमिटेड और अहिंसागेन फ़ाउंडेशन का संयुक्त प्रयास है।

कंपनियों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है?

एआईएम (AIM-Ahimsa Index Methodology) ढाँचे के अंतर्गत प्रत्येक कंपनी को एक रंग श्रेणी में रखा जाता है:

  • हरा (Green): जिनका व्यवसाय अहिंसा के सिद्धांत के अनुरूप है। केवल इन्हीं कंपनियों को सूचकांक में शामिल किया जाता है।
  • नारंगी (Orange): जिनका पशुओं को होने वाली हानि से सीमित या अप्रत्यक्ष संबंध है (जैसे मांसाहारी भोजन परोसने वाले होटल, कुछ एफएमसीजी या परिधान कंपनियाँ तथा अधिकांश वित्तीय कंपनियाँ)। इन्हें सूचकांक से बाहर रखा जाता है।
  • लाल (Red): जिनका प्रत्यक्ष संबंध मांस, दुग्ध, चमड़ा, पशु-परीक्षण तथा व्यापक अहिंसा सिद्धांत के विरुद्ध माने जाने वाले शराब, तंबाकू, हथियार और जुए जैसे व्यवसायों से है।
  • बहिष्कृत क्षेत्र: मांस, दुग्ध, पोल्ट्री, चमड़ा, प्रसाधन सामग्री, ऊन/चमड़े का उपयोग करने वाले फैशन उद्योग तथा पशु-परीक्षण करने वाली औषधि कंपनियाँ।

यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • यह ESG की अवधारणा का भी विस्तार करता है। अब तक भारत में नैतिक निवेश का अर्थ मुख्यतः पर्यावरण, सुशासन और श्रम संबंधी मानकों तक सीमित था। यह सूचकांक पशु कल्याण को भी एक स्वतंत्र चयन मानदंड के रूप में जोड़ता है। यह महात्मा गांधी के अहिंसा के उस विचार के अधिक निकट है, जिसमें अहिंसा केवल एक रणनीति नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत है। यहाँ यह सिद्धांत निवेश के माध्यम से भी लागू किया गया है।

स्रोत: TH

कार्लापाट बॉक्साइट ब्लॉक

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था

चर्चा में क्यों?

  • भारत के कुछ सबसे बड़े औद्योगिक समूह ओडिशा के कार्लापाट बॉक्साइट ब्लॉक में रुचि दिखा रहे हैं।

कार्लापाट बॉक्साइट ब्लॉक का परिचय

  • कार्लापाट ओडिशा के सबसे बड़े बॉक्साइट भंडारों में से एक है। इसमें भारत के कुल बॉक्साइट संसाधनों का 41 प्रतिशत भाग है।
  • ओडिशा भारत का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। अन्य प्रमुख बॉक्साइट उत्पादक राज्य झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश हैं।
  • ओडिशा सरकार के भूविज्ञान निदेशालय के अनुसार, इसमें लगभग 207 मिलियन टन बॉक्साइट संसाधन का अनुमान है, जिसमें 153 मिलियन टन सिद्ध भंडार तथा 54 मिलियन टन संभावित भंडार शामिल हैं।
  • कार्लापाट बॉक्साइट भंडार एक ग्रीनफ़ील्ड खनन ब्लॉक है, अर्थात् यहाँ पहले कभी व्यावसायिक खनन नहीं किया गया है।

यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • बॉक्साइट एल्युमिनियम के उत्पादन के लिए उपयोग किया जाने वाला एकमात्र वाणिज्यिक अयस्क है।
  • यहाँ का बॉक्साइट लाखों वर्षों तक चली रासायनिक अपक्षय (लेटराइटीकरण) की प्रक्रिया से बना है। इस प्रक्रिया में मूल प्रीकैम्ब्रियन चट्टानें, मुख्यतः खोंडालाइट (गार्नेट-सिलिमेनाइट-ग्रेफाइट नाइस) तथा चार्नोकाइट, धीरे-धीरे अपघटित हो गईं और उनके स्थान पर एल्युमिनियम-समृद्ध अवशेष रह गए।
  • एल्युमिनियम सिलिका-आधारित पदार्थों के बाद उद्योगों में सर्वाधिक उपयोग की जाने वाली दूसरी धातु है। इसका उपयोग परिवहन, निर्माण, विद्युत, रसायन तथा विनिर्माण सहित अनेक क्षेत्रों में किया जाता है।

स्रोत: BS

बहिर्ग्रह बीटा पिक्टोरिस d

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अंतरिक्ष 

चर्चा में क्यों ?

  • नासा के जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन (JWST) ने बीटा पिक्टोरिस d नामक एक नए बहिर्ग्रह की पहचान की है।
  • बहिर्ग्रह (Exoplanets/Extrasolar Planets) वे ग्रह हैं, जो हमारे सौर मंडल के बाहर स्थित तारों की परिक्रमा करते हैं।

बीटा पिक्टोरियस

  • बीटा पिक्टोरिस पृथ्वी से 63 प्रकाश-वर्ष दूर, पिक्टर (Pictor) नामक चित्रफलक (ईज़ल) के आकार वाले दक्षिणी तारामंडल में स्थित है।
  • यह आकाशगंगा (मिल्की वे) का एक निकटवर्ती तारकीय तंत्र है, जो नवगठित ग्रहों तथा उनके निर्माण के बाद शेष रह गई धूल और मलबे की चक्रिका के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं की दुर्लभ झलक प्रदान करता है।
  • बीटा पिक्टोरिस d, बीटा पिक्टोरिस तारे की परिक्रमा करने वाला तीसरा ज्ञात ग्रह है। इससे पहले बीटा पिक्टोरिस b और बीटा पिक्टोरिस c की खोज हो चुकी है।
  • इससे बीटा पिक्टोरिस ऐसा दूसरा ग्रह तंत्र बन गया है, जिसमें तीन बहिर्ग्रहों का प्रत्यक्ष चित्रण (Direct Imaging) किया जा चुका है।
  • यह आकार में बृहस्पति से थोड़ा बड़ा है और अपने तारे की एक परिक्रमा पूरी करने में 91 वर्ष लेता है, जो अरुण (यूरेनस) द्वारा हमारे सूर्य की परिक्रमा करने में लगने वाले समय से थोड़ा अधिक है।

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप 

  • यह विश्व की प्रमुख अंतरिक्ष विज्ञान वेधशाला है। जेम्स वेब हमारे सौर मंडल के रहस्यों को समझने, अन्य तारों के चारों ओर स्थित दूरस्थ ग्रहों का अध्ययन करने तथा हमारे ब्रह्मांड की रहस्यमयी संरचनाओं, उत्पत्ति और उसमें हमारे स्थान की खोज करने का कार्य कर रही है।
  • यह नासा के नेतृत्व में संचालित एक अंतर्राष्ट्रीय  कार्यक्रम है, जिसमें उसके सहयोगी यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) तथा कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) शामिल हैं।

स्रोत: TH

श्वेत-उदरीय बगुला (White-bellied Heron)

पाठ्यक्रम: जीएस-3/प्रजातियाँ 

चर्चा में क्यों ?

  • वन सलाहकार समिति ने सिद्धांततः 1,200 मेगावाट लोहित जलविद्युत परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है, जिससे श्वेत-उदर बगुले के आवास पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

श्वेत-उदरीय बगुला (Ardea insignis) 

  • यह विश्व के सबसे दुर्लभ और कम दिखाई देने वाले पक्षियों में से एक है। यह प्राचीन वनों से घिरी तेज़ प्रवाह वाली नदियों के किनारे घोंसला बनाता है।
  • आवास: यह मुख्यतः छोटी या बड़ी नदियों में पाया जाता है, जहाँ सामान्यतः रेत या कंकड़-पत्थर के तट होते हैं। यह प्रायः उपोष्णकटिबंधीय/उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले वनों के भीतर या उनके समीप, मैदानी क्षेत्रों से लेकर कम-से-कम 1,500 मीटर की ऊँचाई तक तथा आर्द्र घासभूमियों के निकट स्थित दलदलों और झीलों में पाया जाता है।
  • यह समुद्र तल से लगभग 1,500 मीटर की ऊँचाई तक के हिमालयी नदी तंत्रों में निवास करता है।
  • यह मछलियों का शिकार करने, घोंसला बनाने तथा विश्राम करने के लिए तेज़ प्रवाह वाली उथली नदियों और नदी तटीय प्राचीन वनों (Riparian Forests) पर निर्भर करता है।
  • भारत में वितरण: भारत में इसकी केवल 6–9 संख्या अरुणाचल प्रदेश की नोआ-देहिंग, लाह्म और लोहित नदियों में पाई जाती है।
  • लोहित नदी का बेसिन भारत में इस प्रजाति की लगभग 70% आबादी का आश्रय स्थल है।
  • खतरे: इसके लिए प्रमुख खतरे वनों और आर्द्रभूमियों का व्यापक विनाश, क्षरण तथा मानवीय हस्तक्षेप माने जाते हैं।
  • यह प्रजाति मानवीय गतिविधियों से होने वाले व्यवधान के प्रति भी अत्यंत संवेदनशील है।

संरक्षण स्थिति:

  • आईयूसीएन रेड लिस्ट में 2007 से इसे क्रिटिकली इंडेन्जर्ड (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत इसे संरक्षण प्राप्त है।

स्रोत:TH

 

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